नया पुराना उपयोगी सामान हमें गिफ्ट कीजिये...
'SUKOON' is a center for Giving & Taking - New & Old useful items,,, totally FREE...
Udaipur, Rajasthan, Mo. 9828073690 ( निःशुल्क सेवा )
- ( Since, May-2014... continue everyday )

 

आज दुनिया की सबसे बड़ी दो समस्याऐ ग्लोबल वार्मिंग एवं आतंकवाद हे, 21वीं शताब्दी का सबसे बड़ा खतरा ग्लोबल वार्मिंग बताया जा रहा है वैश्विक तापमान बढ़ने का मतलब है कि पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है।  वैज्ञानिकों का कहना है कि समुन्द्र का जलस्तर बढेगा, आने वाले दिनों में सूखा बढ़ेगा, बाढ़ की घटनाएँ बढ़ेगी और मौसम का मिज़ाज पूरी तरह बदला हुआ दिखेगा। इस समस्या के विकराल रूप के पिछे कई कारण रहे हे जिनमे ग्रीन हाउस गैस, पेड़ो की अंधाधुंध कटाई, ई कचरा, इत्यादि के साथ 90 प्रतिशत योगदान मानवजनित कार्बन उत्सर्जन को माना गया। इससे निजात पाने के लिए दुनिया के कई ताकतवर देश, ओर्गनाईजेशन एवं चिन्तनशील व्यक्ति कदम उठा रहे हे।

जब 90 प्रतिशत योगदान मानवजनित कार्बन उत्सर्जन को माना गया तो इसका समाधान भी मानवजनित प्रयास से ही होगा, हमें हमारी आदतों, आवश्यकताओं एवं जीवनशेली में सुधार एवं बदलाव की अत्यंत आवश्यकता हे।

“सुकून” कांसेप्ट के पीछे भी यही भाव हे की हम हर इस्तेमाल हो चुकी उपयोगी वस्तुओं को आपस में आदान-प्रदान कर, या गिफ्ट करके (रिसाईकल) पुनरुपयोग करना शुरू कर दे एक दुसरे को अच्छी वस्तु उपहार देना शुरू कर दे तो इससे ग्लोबल वार्मिंग समाधान के साथ देश को बहुत फायदा होगा।

आज एक जींस की पेंट बनाने में सेकड़ो लीटर पानी चाहिए, फर्नीचर बनाने में कितने पेड़ काटे जाते हे, प्लास्टिक के आइटम बनाने में कितनी गर्म भट्टी जलानी पड़ती हे, किताबे बनाने में कितना पानी एवं पेड़ो की बर्बादी होती हे, एक ऐ फॉर साइज के फोटोकॉपी कागज़ को बनाने के लिए लगभग 8 लीटर पानी चाहिए और धार्मिक द्रष्टि से देखा जाए तो एक पानी की बूंद में लाखों जीव होते हे, तो कही ना कही हमने इतने जीवो को बचाकर जीवो की रक्षा भी कर दी।

 

सुकून’ क्या है?

मीडिया एवं पब्लिकेशन क्षेत्र में कार्य करते हुए अक्सर देखा है कि एक व्यक्ति किसी वस्तु के लिए अभावग्रस्त हैं तो दूसरा व्यक्ति ऐसा भी है जिसके पास वही वस्तु बेकार पड़ी है। लेकिन ऐसी वस्तुओं की जानकारी का कोई  सही माध्यम नहीं होने से वह वस्तु बेकार पड़ी रहती है। फिर वह कबाड़ी के यहां चली जाती हैं। हमने इन उपयोगी वस्तुओ को रिसाईकल करते हुए दुबारा उपयोग करने की मनोवृति पर काम करने की जरुरत महसूस हुई
अतः इस कमी को पूरा करने हेतु भारत में अपने आप में अनोखा एक ऐसा विशाल सेंटर किराए पर जगह लेकर शुरू किया जो 2014 से उदयपुर में चल रहा हे जहां हर वस्तु निःशुल्क गिफ्ट में मिलती हे। इसी वजह से हम “सुकून मिशन” में दान शब्द की जगह सम्मानजनक “गिफ्ट” शब्द को प्रयोग करते हे। दान नहीं गिफ्ट कल्चर पर काम करते हुए इस भागमभाग दुनिया में बिना पैसे की एक छोटी दुनिया खड़ी करने का प्रभावी कदम उठाया हे।

“सुकून सेंटर” जहा लोग अपने घर, दूकान या ऑफिस पर पड़ा हुआ उपयोगी सामान जो अब  उनके काम नहीं आ रहा होता हे, तो ऐसा फर्नीचर, टू व्हीलर, साइकिल, कपड़े, किताबे, एक्जाम नोट्स, जुते, पर्स, खिलोने, म्यूजिक सिस्टम, ज्वेलरी, बर्तन, बिस्तर, कंप्यूटर, टी.वी., मिक्सर, प्रेस, वेक्यूम क्लीनर, गीजर, वाटर प्यूरीफायर, मोबाईल, सिलाइ मशिन, सॉफ्ट टॉयज, खेल सामग्री, घड़ी, बच्चों का झुला, फीटनेस इक्युपमेन्ट, गैस चूल्हा, केरम,  कूलर, फ्रीज, स्टेशनरी इत्यादि अनेकों सामान “सुकून सेंटर” को प्रतिदिन बहुत ही अच्छी कंडीशन में गिफ्ट करते हे, हम उस सामान को व्यवस्थित शोरुम की तरह सजाते हे, फिर जिस किसी व्यक्ति, संस्था, संगठन या जरूरतमंद को जरुरत होती हे, वह “सुकून” आता हे निःशुल्क उपहार स्वरुप लेकर जाते हे।

इस मिशन में लगभग 200 वोलेंटीयर दिल से जुड़े हुए हे। प्रभु कृपा से हर रोज यहाँ उपयोगी सामान गिफ्ट आता हे या हम जाकर लाते हे। सबसे बडी बात यह हे की प्रतिदिन 25, कभी 40 तो कभी 50 व्यक्ति दूर दूर गाँवों, कच्ची बस्ती एवं शहर के विभिन्न क्षेत्रो से सुकून सेंटर पर आते हे अपनी जरुरत का सामान पसंद करते हे, हमें बताते हे और वो गुड कंडीशन सामान निःशुल्क लेकर जाते हे। 
 

किसी को गिफ्ट देकर सुकून एवं पुण्य मिलता हे, किसी को गिफ्ट पाकर सुकून मिलता हे और हमें किसी को दिलवाकर सुकून मिलता हे, क्योंकि आज हर इंसान को बस सुकून की ही तो तलाश हे ।

खास निवेदन है सभी से रहता हे की हमें दवाईयां तथा टूटा, फूटा, भंगार या कबाड़ी के काम आए ऐसा सामान हमें ना देवें। सामान ऐसा हो जिससे आपको, हमको और लेने वाले तीनो को सुकून मिले।
इस दृढ संकल्प एवं विश्वास के साथ की निरंतर मन-वचन-काया से हमें इस देशव्यापी मिशन को देश के कोने-कोने तकपहुचाना हे।
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मान्यवर
‘सुकून’ कोई संस्था, एनजीओ, फाउण्डेशन या ट्रस्ट नहीं, बस एक देशव्यापी मिशन है, हम इस कार्य को धन कमाने या फंड इकट्ठा करने के लिए नहीं कर रहे हैं। सच्ची सेवा का भाव लेकर शुद्ध अंतःकरण से बस एक माध्यम बनना चाहते है,  हमारा‘सुकून’ के नाम से किसी बेंक में कोई अकाउंट भी नहीं हे, और ना ही हमारे पास कोई रसीद बुक हैं, किसी भी संस्था, सरकार या किसी उधोगपति से कोई डोनेशन (केश या चेकहम स्वीकार ही नहीं करते है क्योंकि  ‘सुकून’ मिशन DONATIONSएकत्रित करने के लिए नहीं    DO-NATIONS के लिए है।
बस केवल ऊपरवाले (भगवानकी एनर्जी को साथ लेकर मई 2014 से लगा हुआ हु... पुरे साल 365 दिन सुबह से शाम तक और हमारे समर्पित वोलेंटीयर का (शारीरिक और मानसिक सहयोग मुझे ऊर्जावान बनाए रखता हे ....
मतलब की ’सुकून’ वर्तमान जीवन-शैली के बारे मे पुनर्विचार करने हेतु बड़ा मिशन हैं।

 

सुकून ।
मान्यवर, आज इंसान ने अपनी जरूरतें इतनी पैदा कर ली हैं, जिन्हें पूरा करते-करते बुढ़ापा तक आ जाता हैं। इस भागमभाग दुनिया मे कितना भी कुछ कर लेवे फिर भी सुकून के ‘उस पल’ के लिए पूरी उम्र तरसते ही रहते हैं। जरा सोचिए, क्या हमारा जन्म केवल और केवल जरूरतें पूरी करने के लिए ही हुआ हैं ???
यह वाकई एक प्रश्न हे जो मन को झ़कझोर देता हैं।
आप भी जुड़िये।
यदि आप इस देशव्यापी मिशन से तन-मन-... समय, सेवा, सलाह, आईडिया, मार्गदर्शन या वालेंटियर किसी भी रुप में जुड़ना चाहें अथवा कोई हुनर या ज्ञान बांटना चाहते है। तो तहेदिल से  सम्पत बापना तथा ‘सुकून परिवार’ की टीम स्वेच्छिक जुड़ चुके युवक-युवतियां एवं सीनियर सिटीजंस आपका स्वागत, अभिनंदन करने को उत्सुक है। यदि संभव हो तो इस मिशन के बारे मे परिवार, मित्रो एवं रिश्तेदारों से चर्चा करे। इन्टरनेट, ईमेल, ब्लाॅग, वाॅट्स एप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर मेसेज पोस्ट या शेयर करके भी आप बहुत बड़ी सेवा व सहयोग कर सकते हैं। जो लोग जुड़ चुके हे उनका एक ही काम होता हे की वो उनके गाँव, कोलोनी या एरिये में जो भी जरूरतमंद व्यक्ति हे, परिवार हे जिसको कोई भी कैसा भी सामान चाहिए उन लोगो को सुकून मिशन के बारे में बताना और उन्हें सुकून भेजना या संभव हो तो साथ लेकर आना। यदि सामान उपलब्ध होता हे तो हम हाथोहाथ गिफ्ट कर देते हे, ओर नहीं होने की स्तिथि में उसका नाम पता नोट कर लेते हे, जैसे ही वह सामान आता हे हम उनको फोन करके बुलाते हे फिर गिफ्ट कर देते हे ।